चौंकाने वाला खुलासा: चिप्स और गुटखा ट्रेन देरी का कारण! Ministry of Railways ने शुरू की गंदगी पर बड़ी जांच

चिप्स और गुटखा

यात्रीगण कृपया ध्यान दें! आपके ‘गुटखा और चिप्स’ की आदतें ट्रेन को कर रही हैं लेट? रेलवे मंत्रालय की जांच से बड़ा खुलासा

बड़ी खबर: अगर आप ट्रेन में सफर करते समय खाली चिप्स के पैकेट, प्लास्टिक की बोतलें या चबाया हुआ गुटखा (तंबाकू) टॉयलेट में फ्लश करते हैं, तो यह खबर आपके लिए एक बड़ा सबक है। (Ministry of Railways) द्वारा हाल ही में की गई एक आंतरिक जांच और सर्वेक्षण में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।

रेलवे ने पाया है कि रेलगाड़ियों के शौचालयों में जाम और रुकावट, जो सीधे तौर पर रेल परिचालन (Operation) को प्रभावित करती है, मुख्यतः यात्रियों द्वारा गुटखा पाउच, चिप्स के पैकेट, प्लास्टिक की बोतलें और अन्य ठोस अपशिष्ट को शौचालय में फेंकने के कारण होती है।

कैसे चिप्स का पैकेट ट्रेन को करता है लेट?
आधुनिक ट्रेनों, खासकर राजधानी, शताब्दी और अन्य प्रीमियम एक्सप्रेस ट्रेनों में आमतौर पर वैक्यूम टॉयलेट सिस्टम या बायो-टॉयलेट होते हैं। ये सिस्टम पानी बचाते हैं और मल-मूत्र को आसानी से बाहर निकाल देते हैं।

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जब यात्री इन टॉयलेट में निम्नलिखित चीजें फ्लश कर देते हैं:

  • गुटखा या तंबाकू के पाउच
  • चिप्स और स्नैक्स के प्लास्टिक पैकेट
  • छोटी प्लास्टिक की बोतलें या रैपर
  • कपड़े के टुकड़े या सैनिटरी पैड

तब ये ठोस वस्तुएं पाइपों में फंसकर गंभीर ब्लॉकेज पैदा कर देती हैं।


ब्लॉकेज का सीधा असर ट्रेन के समय पर


जब किसी कोच का शौचालय पूरी तरह से जाम हो जाता है तो रेलवे को उसकी मरम्मत के लिए ट्रेन को बीच रास्ते में या अगले प्रमुख स्टेशन पर रोकना पड़ता है।

  • रखरखाव का समय: इस रुकावट की मरम्मत के लिए एक विशेष तकनीकी टीम की आवश्यकता होती है, जिसमें 30 मिनट से लेकर 1 घंटे तक का समय लग सकता है।
  • अन्य ट्रेनों पर प्रभाव: एक ट्रेन रुकने से उसके पीछे आने वाली कई अन्य ट्रेनों के सिग्नल बाधित हो जाते हैं, जिससे उनका पूरा शेड्यूल बिगड़ जाता है।
  • यात्रियों को असुविधा: न केवल ट्रेन देरी से चलती है, बल्कि कोच में सवार अन्य यात्रियों को भी शौचालय का उपयोग न कर पाने के कारण काफी असुविधा का सामना करना पड़ता है।

रेल मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, “समस्या इतनी गंभीर हो गई है कि कई बार शौचालयों में रुकावट के कारण ट्रेनें 45 मिनट से एक घंटे तक विलंबित हो जाती हैं।”

रेलवे की अपील: ‘डस्टबिन’ का करें उपयोग


रेलवे ने अब इस समस्या से निपटने के लिए एक बड़ा जागरूकता अभियान शुरू किया है।

  1. सख्त जुर्माने की तैयारी: रेलवे नियमों का उल्लंघन करने और ट्रेनों में कूड़ा फेंकने वाले यात्रियों पर सख्त जुर्माना लगाने की तैयारी कर रहा है।
  2. जागरूकता अभियान: शौचालयों और डिब्बों के अंदर बड़े-बड़े स्टिकर और घोषणाओं के माध्यम से यात्रियों से आग्रह किया जा रहा है कि वे केवल मलमूत्र और टॉयलेट पेपर (यदि उपलब्ध हो) ही फ्लश करें।
  3. उचित उपयोग: सभी यात्रियों से अनुरोध है कि वे शौचालयों के बाहर लगे कूड़ेदानों का उपयोग गुटखा, चिप्स के पैकेट, बोतलें और अन्य कचरा फेंकने के लिए करें।

आपकी छोटी-सी पहल ट्रेनों को समय पर चलाने और भारतीय रेलवे को साफ़-सुथरा रखने में काफ़ी मददगार साबित हो सकती है। अगली बार जब आप यात्रा करें, तो याद रखें: आपकी अच्छी आदतें आपकी ट्रेन को लेट होने से बचा सकती हैं!

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