S.I.R और NRC: भ्रम या सच्चाई?
हाल ही में चुनाव आयोग द्वारा शुरू किए गए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न’ (S.I.R – Special Intensive Revision) ने देश के कई हिस्सों में हलचल मचा दी है। मतदाता सूची को “साफ़” करने के उद्देश्य से शुरू की गई यह प्रक्रिया विवादों में घिर गई है क्योंकि कुछ राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं ने इसे NRC (National Register of Citizens) का ‘छिपा हुआ रूप’ बताया है।
S.I.R का मकसद मतदाता सूचियों से गलतियाँ, डुप्लीकेट नाम और स्थानांतरित (Migrated) वोटर्स को हटाना है। हालांकि, इसमें नागरिकों से कुछ ऐसे दस्तावेज़ माँगे जा रहे हैं, जिन्हें लेकर यह डर फैल रहा है कि इसका इस्तेमाल नागरिकता साबित करने के लिए किया जाएगा, जैसा कि NRC में होता है।
S.I.R को NRC क्यों कहा गया? सुप्रीम कोर्ट और वकील महमूद प्राचा का रुख
DMK जैसी पार्टियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर कर दावा किया है कि एसआईआर प्रक्रिया एक “संवैधानिक उल्लंघन” है और एक तरह से वास्तविक एनआरसी है। उनका तर्क है कि इस कठोर प्रक्रिया के कारण लाखों योग्य मतदाता, खासकर गरीब, प्रवासी और वंचित समुदायों के मतदाता, चुनाव से बाहर हो सकते हैं।
महमूद प्राचा ने क्या कहा?
सीनियर एडवोकेट महमूद प्राचा ने सार्वजनिक मंचों पर इस मामले पर अपनी राय रखी है। प्राचा, जो अपने कानूनी एक्टिविज़्म के लिए जाने जाते हैं, ने कई बार सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। S.I.R के संदर्भ में, उन्होंने मतदाता सूची संशोधन की प्रक्रिया में पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि अगर कोई भी सरकारी प्रक्रिया लोगों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है या उन्हें बेवजह नागरिकता साबित करने के बोझ में डालती है, तो उसे रद्द किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष: चुनाव आयोग S.I.R को मतदाता सूची शुद्ध करने का एक रूटीन काम बता रहा है, जबकि विरोधी और एक्टिविस्ट इसे NRC लागू करने की एक अप्रत्यक्ष कोशिश मान रहे हैं। अब देखना यह है कि सुप्रीम कोर्ट इस संवेदनशील मामले पर क्या अंतिम फैसला सुनाता है।
- मुख्य बिन्दु (Key Points)
S.I.R. विवाद: चुनाव आयोग की मतदाता सूची शुद्धीकरण प्रक्रिया (S.I.R. – Special Intensive Revision) पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कई लोग इसे NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) को लागू करने का छिपा हुआ तरीका मान रहे हैं। - NRC का डर: विरोधियों का आरोप है कि S.I.R. में माँगे जा रहे कठोर दस्तावेज़ों के कारण, गरीब, अल्पसंख्यक, और प्रवासी जैसे वंचित समुदायों के लाखों पात्र वोटर्स को मनमाने ढंग से सूची से बाहर किया जा सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट की एंट्री: यह विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच चुका है, जहाँ याचिकाओं में S.I.R. प्रक्रिया को संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन बताते हुए इसे रद्द करने की मांग की गई है।
- महमूद प्राचा का रुख: वरिष्ठ वकील महमूद प्राचा ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और नागरिक अधिकारों पर इसके संभावित नकारात्मक प्रभाव को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
- मुख्य अंतर: जहाँ चुनाव आयोग इसे मतदाता सूची को त्रुटिहीन बनाने का रूटीन काम बता रहा है, वहीं आलोचक इसे नागरिकता सिद्ध करने के अतिरिक्त बोझ के रूप में देख रहे हैं।
(FAQs)
- S.I.R. क्या है? इसका पूरा नाम क्या है?
S.I.R. का पूरा नाम Special Intensive Revision (स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न) है। यह भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा शुरू की गई एक प्रक्रिया है जिसका उद्देश्य मतदाता सूचियों से गलतियाँ, डुप्लीकेट नाम और अपात्र लोगों को हटाकर सूची को शुद्ध और सटीक बनाना है। - S.I.R. को NRC से क्यों जोड़ा जा रहा है?
S.I.R. को NRC (नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स) से इसलिए जोड़ा जा रहा है क्योंकि इस प्रक्रिया में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) घर-घर जाकर नागरिकों से दस्तावेज़ मांगते हैं। विरोधियों का आरोप है कि इन दस्तावेज़ों की माँग इतनी सख़्त है कि यह प्रक्रिया अप्रत्यक्ष रूप से नागरिकता साबित करने का बोझ डालती है, जिससे NRC जैसा डर पैदा होता है। - सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को लेकर क्या हो रहा है?
विभिन्न राजनीतिक दलों और एक्टिविस्टों ने S.I.R. प्रक्रिया को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दायर की हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि S.I.R. से लाखों योग्य मतदाता मनमाने ढंग से बाहर हो सकते हैं, जो संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट इस मामले पर सुनवाई कर रहा है ताकि मतदाता सूची की शुद्धता और नागरिकों के अधिकारों के बीच संतुलन बनाया जा सके। - एडवोकेट महमूद प्राचा ने S.I.R. के बारे में क्या कहा है?
एडवोकेट महमूद प्राचा ने S.I.R. की प्रक्रिया की पारदर्शिता और संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है कि यह प्रक्रिया गरीब और वंचित समुदायों पर नागरिकता सिद्ध करने का अनावश्यक बोझ डालती है और इससे लोकतंत्र में बड़े पैमाने पर लोगों को मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। - S.I.R. और NRC में मुख्य अंतर क्या है?
* S.I.R.: इसका उद्देश्य मतदाता सूची (Voter Roll) को अपडेट करना है, जिसका सीधा संबंध मतदान के अधिकार से है।
* NRC: इसका उद्देश्य नागरिकों की पहचान करना है, जिसका सीधा संबंध देश की नागरिकता से है।
चुनाव आयोग का कहना है कि S.I.R. केवल एक प्रशासनिक प्रक्रिया है, जबकि आलोचक इसे नागरिकता की जाँच का रूप मान रहे हैं।



